युवा और जीवन शैली।
। हम गांवों शहरों में देखते हैं बच्चे पढ़ाई को छोड़कर गलत सँगत मे फस जाते हैं। वे सही और गलत का फर्क नही कर पाते । एक बार गलती चल जाती है लेकिन बार बार गलती करने को हम आदत कहते हैं। इस उम्र में अच्छा करियर बनाया जा सकता है । युवा अपने सपने को पूरा कर सकता है ओर बहुत आगे जा सकता है लेकिन गलत राह में जाने से उसके सपनो के साथ उनके घर की उम्मीदों को भी वह मार देता है।
इस उम्र में हम देखते हैं बच्चे नशा मारपीट अनैतिक व्यवहार चोरी आदि जैसी सामाजिक बुराइयों में लिप्त होकर अपने जीवन को संकट की तरफ ले जाता है बाल अपराध भी इसका एक उदाहरण है। जिससे बड़ी घटना को वो अंजाम दे सकता है।
आजकल के युवा हिंसक पंजाबी गानों को फॉलो भी करने लगे हैं जो चिंता का कारण है उनमें हथियारों का प्रदर्शन होता है धीरे धीरे इससे वे प्रभावित होकर अपराध की तरफ चले जाते हैं । आजकल की मीडिया रिपोर्ट्स ओर गेंगस्टर के जीवन इस बात प्रमाण है। सरकार इसे गानों पर प्रतिबंध लगाए।
सुधार के रूप में स्कूलों में बच्चो के करियर काउंसलिंग ओर मेंटल हेल्थ के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है। जिससे गुमराह बच्चे भी सही रास्ते पर आ सकते हैं। समाज और अभिभावकों ही बच्चो को ध्यान और राह दिखा सकते हैं।
"उठो जागो अपने लक्ष्य को प्राप्त करो'
विवेकानंद जी



Comments
Post a Comment